Sunday, 22 May 2022

महोदय मेरा ही नाम है कन्नौज


धर्म शास्त्रों ऐतिहासिक पुस्तकों में कन्नौज का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है हर्ष कालीन कई प्रमाण आज भी ऐतिहासिक कन्नौज में मौजूद हैं जबकि हिंदुओं के अंतिम राजा पृथ्वीराज चौहान का भी संबंध कन्नौज से रहा है कन्नौज के कई पौराणिक महत्व है हम कन्नौज के बारे में आपको कुछ विशेष जानकारी देते हैं
 पौराणिक प्रमाणों के आधार पर कन्नौज का पहला नाम 'महोदय' दूसरा नाम 'कन्याकुब्ज' और तीसरा नाम कन्याकुब्ज से परिवर्तित होकर 'कान्यकुब्ज' हो गया था ! जिस समय इस नगर को इन तीनों नामों से ख्याति मिली उस समय कुशवंशी राजर्षि कुशनाभ यहां के महाराजा थे । तीसरे नाम कान्यकुब्ज के समय इस राज्य पर महाराज कुशनाभ के अतिरिक्त उनके एकमात्र पुत्र युवराज गाधि और कान्यकुब्ज राज्य के ही अधीन नगर कम्पिल निवासी ब्रम्हर्षि कुमार ब्रम्हदत्त जो कुशनाभ के दामाद थे उनके द्वारा शासन किया जाता था । कान्यकुब्ज के युवराज गाधि जब यहां के राजा बने और उन्होंने अपने राज्य की सीमा का विस्तार हिमालय की दक्षिण सीमा के व्रहद क्षेत्र में करते हुए अपना प्रताप स्थापित किया तब कन्नौज का चौथा नाम 'गाधिपुरी' हो गया था । महाराज गाधि की एकमात्र सन्तान के रूप में उनकी पुत्री सत्यवती थी । जिसका विवाह उन्होंने ब्रम्हर्षि भृगु व दानव कन्या पौलमी के पुत्र ऋचीक के साथ किया था । 
 

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